मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना
बेटियों के बारे में समाज में पाई जानेवाली नकारात्मक सोच,लड़कों के मुकाबले उनकी कम होती संख्या बालिका शिक्षा की कमजोर स्थिति बेटियों की जल्दी ब्याह देने की प्रवृति जैसी समस्याओं का निराकरण आदि को देखते हुए
लक्ष्मी लाडली योजना राज्य में 15 नवम्बर से चालू किया गया है।
योजना वर्तमान वर्ष 2011 के झारखण्ड स्थापना दिवस अर्थात 15 नवम्बर 2011 से सम्पूर्ण राज्य में लागू होगी। प्रथम वर्ष उक्त तिथि से एक साल पहले तक यानि 15 नवम्बर 2011 तक जन्मी बालिका को भी इस
योजना का लाभ मिल सकेगा।
सरकार क्या करेगी:-
झारखण्ड राज्य के प्रत्येक ठच्स् परिवार में संस्थागत प्रसव से उतपन्न प्रथम प्रसव की पुत्री अथवा द्वितीय प्रसव की पुत्री अथवा दोनों प्रसवों से उत्पन्न पुत्री के नाम से जन्म के वर्ष से लेकर लगातार 5 वर्षो तक प्रतिवर्ष
6000/- रूपये की दर से यानि कुल 5 वर्षो में 30000/- रूपये डाक जाम योजना के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा विनियोग किया जायेगा।
क्या फायदा है:-
• बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश करने पर 2000/- रूपये का एकमुश्त भुगतान बालिका को होगा।
• बालिका के कक्षा 9 में प्रवेश करने पर बालिका को एकमुश्त 4000/- रूपये का भुगतान होगा।
• बालिका के कक्षा 11वी में प्रवेश पर मो॰ 7500/- रूपये का एकमुश्त भुगतान होगा।
• 11वीं तथा 12वीं में उपरोक्त के अतिरिक्त किसी भी अन्य योजनाओं से प्राप्त सुविधाओं के अलावे प्रतिमाह 200/- रूपये का स्कालरशिप का भुगतान बालिका को इस मद से किया जायेगा।
• बलिका की आयु 21 वर्ष होने तथा 12वीं परीक्षा में सम्मिलित हो जाने पर लगभग 1,08,000/- एक लाख आठ हजार) रूपये का एकमुश्त भुगतान बालिका को कर दिया जायेगा किन्तु शर्त यह होगी कि बालिका का
विवाह उसके 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने पर ही हुई हो।
• योजना के मध्य यानी 21 वर्ष की आयु वर्ष होने के पूर्व भी बालिका के आवेदन पर उस दिनांक तक देय समस्त राशि का भुगतान समयपूर्ण किया जा सकेगा बशर्ते कि:-
क) बालिका की आयु 18 वर्ष हो चुकी हो।
ख) बारहवीं की परीक्षा में सम्मिलित हो।
ग) उसका विवाह 18 वर्ष की आयु अथवा उसकs बाद हुआ हो।
घ) उसका जन्म संस्थागत हुआ हो।
कौन योग्य हैं:-
1. गरीबी रेखा के अन्तर्गत हो अथवा वार्षिक आय 72000/--रूपये तक हो।
2. अधिकतम दो बच्चों के बाद परिवार नियोजन दम्पत्ति द्वारा अपना ली गई हो।
3. दिनांक 15 नवम्बर 2010 को अथवा इसके बाद जन्मी बालिका हो।
4. यदि माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई हो तो परिवार नियोजन की शर्त शिथिल हो जायेगी परन्तु मृत्यु प्रमाण-पत्र आवश्यक होगा।
5. यदि अनाथ/गोद ली गई बालिका है, तो प्रथम बालिका मानी जायेगी।
6. यदि जुड़वा हो तो भी मान्य होगा यदि दोनों बच्चियों होगी तो दोनों को मान्य होगा।
7. दूसरी पुत्री के मामले में यह तभी मान्य होगा जब माता या पिता के नसबंदी का प्रमाण-पत्र आवेदन के साथ संलग्न हो।
8. अनाथ बालिका होने पर जन्म के 5 साल तक किया गया पंजीकरण मान्य होगा।
9. जन्म के एक वर्ष के अन्दर आवेदन देना अनिवार्य होगा, एक वर्ष से अधिक पुराना जन्म का मामला मान्य नहीं हो पायेगा।
10. योजना कार्यान्वयन के प्रथम वर्ष यानी 2011-12 में वैसे मामले भी संज्ञान में लिये जायेगे जिनका जन्म एक साल पहले यानि 15.11.2010 या इसके बाद हुआ हो परन्तु यह शिथिलता सिर्फ प्रथम वर्ष होगी।
11. प्रसव संस्थागत हो तथा जन्म प्रमाण-पत्र सम्बन्धित अस्पताल तथा सक्षम पंचायत/नगर निकाय द्वारा निर्गत हो।
12. बालिका के कक्षा 6वीं में पहुचने पर होनेवाले प्रथम भुगतान के पूर्व संबंधित परियोजना पदाधिकारी प्रत्येक बालिका के लिए आधार पहचान पत्र (UID) बनाना सुनिश्चित करेंगे। किसी भी भुगतान के समय लाभार्थी एवं
उनके परिजनों का आधार पहचान पत्र संख्या होना अनिवार्य होगा।
अपवाद:-
• यदि बच्ची का निबंधन सही हुआ हो परन्तु योजना के किसी भी स्तर पर वह निर्धारित आहर्ता प्राप्त नहीं कर पाती हो यानी 5वीं, 8वीं, 10वीं, या 12वीं कक्षा के पूर्व विद्यालय परित्याग कर देती है तो तत्काल प्रभाव
से योजना का लाभ उसे नहीं दिया जा सकेगा।
• बच्ची का विवाह 18 वर्ष से कम आयु होने पर आगे किसी भी प्रदाय की हकदार वह नहीं होगी।
• यदि बालिका की असमय मृत्यु हो जाती है तो प्रदाय का हकदार उसका परिवार नहीं होगा।
• ऐसी किसी भी स्थिति में समस्त राशि/अवशेष राशि राजकोष में जमा कर दी जायेगी।
आवेदन प्रक्रिया:-
• अभ्यर्थी को अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र में विहित प्रपत्र में आवेदन देना होगा।
• जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बी॰पी॰एल॰ सूची में शामिल होने संबंधित प्रमाण पत्र आवेदन के साथ संलग्न करेगें।
• अनाथ बालिका के मामले में अनाथालाय/संरक्षणालय के अधीक्षक द्वारा बालिका के अनाथालय में प्रवेश के एक वर्ष के अन्दर एवं बालिका की आयु 6 वर्ष होने के पूर्व तक संबंधित परियोजना के अधिकारी को आवेदन
देना होगा।
• द्वितीय प्रसव से उत्पन्न बालिका के मामले में माता या पिता द्वारा बन्ध्याकरण/नसबंदी करा लेने संबंधित प्रमाण पत्र देना आवश्यक होगा।
वर्तमान में अभी तक कुल 1087 बालिकाओं का पोस्ट आफिस में खाता खुलवाकर लाभान्वित किया जा चुका है।
स्वामी विवेकानन्द निःशक्त स्वावलम्बन प्रोत्साहन योजना
क. वह झारखण्ड राज्य का निवासी हो ।
ख. लाभानिवतों की आयु 5 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
ग. वह केन्द्र अथवा राज्य सरकार की योजना के अन्तर्गत पेंशन प्राप्त नहीं कर रहा हो।
घ. निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण (भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा -2 के अन्तर्गत निर्धारित निःशक्त की परिभाषा के अनुसार निःशक्तता श्रेणी के अन्तर्गत आता हो।
ड. लाभान्वित अथवा उसके माता/पिता/अभिभावक की आय आयकर हेतु निर्धारित सीमा से अधिक नहीं हो।
च. जिला चिकित्सा पर्षद द्वारा उसे निःशक्त प्रमाण पत्र निर्गत किया गया हो।
छ. वह केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/केन्द्र एवं राज्य सरकारों के उपक्रमों/केन्द्रों एवं राज्य सरकार से सहायता प्राप्त संस्थाओं का सेवा कर्मी नहीं हो।
इस योजना के अन्तर्गत अर्हताप्राप्त लाभान्वितों के चयन तथा उनके नाम के अनुमोदन हेतु प्रत्येक अनुमण्डल पदाधिकारी (एस0डी0ओ0) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन निम्न रूप से किया गया है
क. अनुमण्डल पदाधिकारी (एस0डी0ओ0) अध्यक्ष
ख. वरीय कार्यपालक दण्डाधिकारी - संयोजक
ग. बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अनुमण्डल मुख्यालय -सदस्य
घ. प्रभारी चिकित्सा अनुमण्डलीय अस्पताल - सदस्य
इस योजना के अन्तर्गत राशि के भुगतान की व्यवस्था इस तरह विकसित की जायेगी कि निःशक्तों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। कालांतर में स्थायी व्यवस्था के तहत् इस राशि का भुगतान बैंक/पोस्ट आफिस के माध्यम
से किया जायेगा। नाबालिग तथा मानसिक रूप से निःशक्त व्यक्तियों के लिए राशि का भुगतान उन्हें किया जायेगा जिनपर वे आश्रित है। शेष निःशक्तों को राशि का भुगतान सीधा किया जायेगा। जबतक बैंक/पोस्ट आफिस के माध्यम
से राशि के भुगतान की व्यवस्था नहीं हो जाती है तबतक प्रखण्ड स्तर पर शिविर लगाकर जिला स्तर से प्रतिनियुक्त किसी वरीय पदाधिकारी की उपस्थिति में भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी।
इस योजना के तहत अर्हताप्राप्त लाभान्वितों को इस योजना के लाभ से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकेगा कि वे सरकार की अन्य किसी कल्याणकारी योजना से लाभान्वित हुए हैं या हो रहे हों।
इस योजना अन्तर्गत 40 प्रतिशत या उससे ऊपर के सभी विकलांग व्यक्तियों को 200/- दो सौ रूपया) प्रति माह सहायता स्वरूप सम्मान राशि दिया जाता है। इस योजना अन्तर्गत 9455 लाभुको को लाभ दिया जा रहा है।
विकलांग कार्यशाला योजना:- इस योजना विकलांग व्यक्तियों जीवन यापन शैली से संबंधित प्रशिक्षण आदि दिया जाता है।
विकलागों के लिए यंत्र एवं उपकरण:- इस योजना अन्तर्गत सभी विकलांग व्यक्तियों को उनके बेहतर एवं सुविधा जनक जीवन यापन हेतु आवश्यक यंत्र एवं उपकरण उपलब्ध कराया जाता है।
विकलांग छात्रवृति:- इस योजना अन्तर्गत पढ़ने वाले सभी विकलांग छात्रों को निम्न रूप से छात्रवृतियाँ प्रदान की जाती हैं।
कक्षा 1 से 8 के विकलांग छात्रों को 50/-(पचास) रूपया प्रति माह
कक्षा 9 से B.A. के विकलांग छात्रों को 250/-दो सौ पचास) रूपया प्रति माह
B.A. से उपर के विकलांग छात्रों को 260/-दो सौ साठ) रूपया प्रति माह के दर से छात्रवृति दी जाती है।
विकलांग व्यक्तियों के लिए व्यवसायिक ऋण की सुविधा:- इस योजना अन्तर्गत सभी इच्छुक विकलांग व्यक्तियों को रोजगार मुहैया कराने के दृष्टिकोण से कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराई जाती है।
अन्तर्जातीय विवाह योजना
इस योजना अन्तर्गत अन्तर्जातीय विवाह करने वाले वर एवं वधु को 25000/-- (पचीस हजार) रूपये अनुदान स्वरूप राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र के माध्यम से दी जाती है।
अति कुपोषित बच्चों के लिए कुपोषण उपचार केन्द्र
कुपोषण उपचार केन्द्र में गाँव के वैसे बच्चे जो अति कुपोषित है को रख कर उनका उपचार किया जाता है एवं स्वस्थ्य होने पर ही उन्हें वहाँ से उनके घर भेजा जाता है। वत्र्तमान मंे माण्डर एवं बुण्डू में कुपोषण उपचार केन्द्र संचालित है।
महिलाओं के दक्षता एवं उद्यमिता विकास हेतु प्रशिक्षण
इस योजना अन्तर्गत ग्रामीण महिलाओं को उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे प्रशिक्षण प्राप्त कर व्यवसाय के माध्यम से धन उपार्जित कर सकें और अपने परिवार के बेहतर जीवन यापन हेतु वित्तीय आधार दे सकें।
डायन प्रथा/दहेज उन्मुलन योजना
इस योजना अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में फैले कुरितियों (डायन प्रथा/दहेज प्रथा) के उन्मुलन हेतु नुक्कड़ नाटक, समाचार पत्र, दुरदर्शन आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार प्रसार कर ग्रामिणों को जागरूक बनाया जाता है।
•राज्यकीय नेत्रहीन/मूक-वधिर विद्यालय - नेत्रहीन/मूक बधिर बच्चों के शिक्षा के लिए आवासीय सुविधा के साथ निःशुल्क शिक्षा एवं किताब वस्त्र आदि सभी सुविधाए दी जाती है। नेत्रहीन विद्यालय में 20 छात्र एवं मूकवधिर
विद्यालय में 26 छात्रों को शिक्षित किया जा रहा है।
समप्रेक्षण गृह
इस गृह में 18 वर्ष से कम उम्र के विधि विवादित बच्चों को रखा जाता है एवं उनके अगले जीवन के सुधार हेतु पढ़ाई-लिखाई के अलावे व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है तथा शारिरिक एवं बौद्धिक क्षमता के विकास हेतु योग आदि का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
स्वयं सेवी संस्था
सरकार द्वारा स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से उनको अनुदान देकर होल्ड एंज होम, महिला हेल्प लाईन, अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय, मंद बुद्धि बच्चों के लिए विशेष स्कूल के माध्यम से पढ़ाई एवं प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था की जाती है।
राजीव गांधी (सबला) योजना
इस योजना अन्तर्गत किशोरी बालिकाओं को (11 वर्ष से 18 वर्ष) सशक्तिकरण हेतु प्रति दिन पोषाहार स्वास्थ शिक्षा उपलब्र्ध कराया जाता हैं एवं विभिन्न प्रकार के दैनिक जीवन उपयोगी प्रशिक्षण दिये जाते हैं।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
1 इस योजना का लाभ गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवार की कन्या को लाभ-प्रदान किया जाता है।
2 लाभान्वितों के चयन में इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना है कि कन्या की आयु 18 वर्ष से अधिक हो तथा पूर्व से विवाहित न हो।
3 वह वहां का स्थाई निवासी हो जिस प्रखण्ड में वह निवास करता हो।
4 इस योजना के तहत लाभुको को दिनाक 01.11.2011 के प्रभाव से आर्थिक सहायता 15,000/- रूपये देने का प्रावधान हैं।
जिला समाज कल्याण कार्यालय राँची का अद्यतन आंकड़ा
| जिला समाज कल्याण कार्यालय राँची का अद्यतन आंकड़ा | ||||
| क्र0 | पद का नाम | स्वीकृत पद | पदस्थापित | रिक्त |
| 1. | स्वीकृत आंगनबाड़ी केन्द्र | 2589 | ||
| 2. | स्वीकृत मिनि आंगनबाड़ी केन्द्र | 243 | ||
| 3. | स्वीकृत आंगनबाड़ी सेविका | 2832 | ||
| 4. | स्वीकृत आंगनबाड़ी सहायिका | 243 | 2808 | 24 |
| 5. | स्वीकृत मिनि आंगनबाड़ी केन्द्र | 2589 | 2570 | 19 |
| 6. | भवनयुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या | 1045 | ||
| 7. | भवनहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या | 1497 | ||
| 8. | शौचालययुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या | 635 | ||
| 9. | शौचालय विहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या | 2197 | ||
| 10. | चापाकल युक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या | 1896 | ||
| 11. | चापाकल विहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या | 936 | ||
| 12. | गर्भवती मातायें की संख्या | 25846 | ||
| 13. | धात्री मातायें | 33604 | ||
| 14. | 0 से 3 वर्ष के बच्चे | 116121 | ||
| 15. | 3 से 6 वर्ष के बच्चे | 96941 | ||
| 16. | किशोरी बालिकायें (11-18 वर्ष) | 138392 | ||
| 17. | स्वामी विवेकानन्द निःशक्त प्रोत्साहन योजना | 9633 | ||
| 18. | मुख्यमंत्री कन्यादान योजना | 567 | ||
| 19. | मुख्यमंत्री लक्षमी लाडली योजना | 5664 | ||
| 20. | नेत्रहीन विद्यालय | 1 | ||
| 21. | स्वीकृत छात्रों की संख्या | 25 | ||
| 22. | मूक बधिर विद्यालय | 1 | ||
| 23. | स्वीकृत छात्रों की संख्या | 30 | ||
| 24. | सम्प्रेक्षण गृह (बालकों के लिए) | 1 | ||
| 25. | स्वीकृत आवासियों की संख्या | 50 | ||
| 26. | नारी निकेतन | 1(निर्माणाधीन) | ||
| 27. | आफ्टर केयर होम | 1(निर्माणाधीन) | ||
| 28. | सम्प्रेक्षण गृह (बालिकाओं के लिए) | 1(निर्माणाधीन) | ||
पोषाहार कार्यक्रम एवं स्वास्थय शिक्षा
इस योजना अन्तर्गत गर्भवती/धात्री महिलाएं एवं छः माह से छः वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से प्रति दिन पूरक पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है तथा स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर प्रतिरक्षण एवं
स्वास्थय की जाँच कराई जाती है। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से दैनिक जीवन में होने वाले परेशानियों एवं बच्चों के लालन पालन आदि के बारे में शिक्षित किया जाता है। 3 वर्ष से 6 वर्ष तक
बच्चों को स्कुल पूर्व शिक्षा के माध्यम से उनका शारीरिक एवं मानसिंक विकास किया जाता हैं ताकि स्कुल जाने के समय वे कतराये नहीं।
इस योजना के अन्तर्गत निम्नलिखित लाभुको को लाभ दिया जा रहा है:-
गर्भवती महिला - 25957
धात्री महिला - 33615
6 माह से 3 वर्ष के बच्चे -115629
3 से 6 वर्ष के बच्चे - 97929
किशोरी बालिका – 71773
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